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शरीर का अम्लीय(Acidic) हो जाना है कैंसर
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कैंसर कोई बीमारी नहीं है। शरीर का सुरक्षा तंत्र हमको बताता है कि हमारा शरीर अम्लीय (Acidic)हो गया है। आप इसको क्षारीय (Alkaline) पर लाने के लिए प्रयास करो। यदि हम किसी भी प्रकार से शरीर को क्षारीय स्थिति में ले आते हैं तो कैंसर अपने आप समाप्त हो जाता है। हमने अपने सामाजिक वातावरण को इतना नष्ट भ्रष्ट कर लिया है कि शरीर की कोशिकाएं अपने बचाव के लिए ऊर्जा के अप्राकृतिक साधन अपनाने लगती हैं। चक्र साधना एवं ऋषि मुनियों की कुछ जड़ी बूटियों से इसको समाप्त किया जा सकता है।

शारीरिक और मानसिक तनाव अथवा भोजन , हवा ,जल आदि से शरीर में जाने वाले विषाक्त पदार्थों (Toxins) से कैंसर की शुरुआत होती है। इनसे शरीर की ऊर्जा कम होने लगती है। शरीर की ऊर्जा कम होने पर शरीर अम्लीय (acidic ) हो जाता है। अगर आप कोई मानसिक तनाव ,चिंता या अवसाद में होते हैं तो आपकी ऊर्जा कम हो जाती है। इस तरह का वातावरण लम्बे समय तक रहने से भी शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है।इस प्रकार के शरीर अम्लीय होता जाता है। ज्यादा समय तक शरीर अम्लीय होने पर शरीर की जो सामान्य कोशिकायें हैं वही कोशिकाएं (cells ) ऑक्सीजन कम होने के कारण मरना शुरू कर देती हैं।

अम्लीय वातावरण और ऑक्सीजन की कमी की वजह से कोशिकायें मरना शुरू हो जाती है। अपने को बचाने के लिए कोशिकाएं बिना ऑक्सीजन के जिन्दा रहने का इंतजाम करती है। कोशिकाएं किण्वन (Fermentation)करना शुरू कर देती हैं। किण्वन के द्वारा कोशिकाएं बिना ऑक्सीजन के ऊर्जा बना पाती है। परन्तु इन कोशिकाओं की अंदरूनी प्राकृतिक कार्यप्रणाली नष्ट हो जाती है। यह कोशिकाएं बार बार अपने को विभाजित करना प्रारम्भ कर देती हैं।

कोशिकाओं की यह प्रकृति ही कैंसर कहलाती है अर्थात शरीर में अम्ल की मात्रा बढ़ने और ऑक्सीजन (ऊर्जा) की कमी से होता है कैंसर। इसका सीधा सा अर्थ है कि जैसे हमारे जीवित रहने के लिए सांस लेने में यदि ऑक्सीजन ना हो तो हम जिन्दा नहीं रह सकते वैसे ही प्रत्येक कोशिका को ऊर्जा के रूप में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। हमारे शरीर में जब क्षारीय स्तर बढ़ता है तो उसका सम्बन्ध सीधा ऑक्सीजन से ही है। जैसे ही किसी भी कारण से अम्लीय स्तर बढ़ता है तो इसका अर्थ है कि शरीर में ऑक्सीजन कम हो रही है। यदि आप सात्विक प्राकृतिक जैविक (Organic) खाना खाते हैं तो शरीर में ऑक्सीजन बढ़ता है और क्षारीय स्तर में वृद्धि होती है।

इसको आप बहुत सस्ते मूत्र परीक्षण (Urine Test)से पता कर सकते हैं।६ तटस्थ (neutral) है। ph का प्रत्येक स्तर लघुगणक (logarithmic) होता है जिसके कारण जैसे जैसे हम नीचे/ऊपर जाते हैं तो प्रत्येक ph का स्तर पहले से १० गुना ज्यादा होता है।

जैसे जैसे हम नीचे की ओर जाते हैं तो कैंसर का खतरा प्रत्येक स्तर पर १० गुना हो जाता है। यदि किसी के मूत्र परीक्षण में ६ से नीचे का ph स्तर है तो उसको सावधान हो जाना चाहिए।

कैंसर का अर्थ अब सामान्य आदमी को अपनी मृत्यु के रूप में दिखाई देता है। जब आप कैंसर संस्थानों के पास जाते हैं तो आपको भय दिखाया जाता है तो आप उस भय से और ज्यादा चिंता और तनाव में आ जाते हैं जो आपके कैंसर को और तेजी से बढ़ाने लगता है।

एक प्राकृतिक कोशिका शरीर को अम्ल से बचाने के लिए अम्ल को अपने अंदर समेट लेती है। ज्यादा बढ़ने पर वह एक गाँठ की तरह दिखती है। जो गाँठ दिखाई देती है वह वास्तव में कैंसर का लक्षण है। वह गाँठ कैंसर नहीं है। यह शरीर की सामान्य बचाव प्रक्रिया है। इस गांठ (tumor ) को काटने (surgery) अथवा रेडिएशन से जलाने अथवा कीमोथेरेपी से छति पहुंचाने से प्राकृतिक सुरक्षा कवच टूट जाता है। उस गाँठ के अंदर जो अम्ल था वह शरीर में फैलने लगता है। जिस कारण से शरीर में ऑक्सीजन की कमी होनी प्रारम्भ हो जाती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ( immune System ) की स्थिति के आधार पर धीरे धीरे या तीव्रता से कैंसर पूरे शरीर में फ़ैल जाता है।

ph measurement

जैसे जैसे हम आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की दवाइयां लेते हैं और साथ ही कीमोथेरेपी और रेडिएशन कराते हैं तो शरीर का सुरक्षा तंत्र ( Immune System ) समाप्त होने लगता है। शरीर के बाल झड़ जाते हैं ,भूख मर जाती है ,अत्यधिक कमजोरी हो जाती है। व्यक्ति काफी तनाव में रहता है और पूरा शरीर टूट चुका होता है। आधुनिक पद्धतियों से चिकित्सा से कैंसर और बढ़ने में मदद मिलती है। कैंसर के असल कारण का निवारण किये बिना कैंसर को ठीक नहीं किया जा सकता है।

शरीर को क्षारीय प्रकृति (Alkaline Nature ) पर लाये बिना कैंसर को ठीक नहीं किया जा सकता। ऋषि मुनियों की चक्र उपचार पद्धति (Chakra Therapy ) कैंसर का समाप्त करने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान कर सकती है।इसके लिए सुयोग्य चक्रों के जानकार के पास जाना ही एकमात्र सरल ,सुगम और अचूक उपाय है। अभी चक्र पद्धति का प्रचार प्रसार कम होने के कारण इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है।

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