मानव शरीर के लिए पानी की आवशयक मात्रा
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जो डॉक्टर या वैद्य अच्छे स्वास्थ्य के लिए हर रोज कम से कम ८-९ ग्लास या उस से भी ज्यादा पानी पीने की सलाह देते हैं वह हमारे जीवन के साथ खिलवाड़ और धोखा कर रहे हैं। किडनी में आने वाली परेशानियों की जड़ में गलत जल सेवन का भी बहुत बड़ा हाथ है। मानव शरीर में ७०% जल ही है। शरीर का यह जलीय भाग मलमूत्र और पसीने के साथ बाहर निकलता रहता है। इसका संतुलन बनाये रखने के लिए थोड़ा थोड़ा जल पीना नितान्त आवश्यक है।

आयुर्वेद के महान ग्रन्थ सुश्रुत संहिता ,सूत्र स्थान ४६/५११ के सूत्र अनुसार –

“अत्यधिक जल सेवन से अजीर्ण हो जाता है। अजीर्ण के परिणामस्वरूप बेहोशी, प्रलाप, जी मिचलाना, अधिक लार बनना और गिरना, शरीर में टूटने जैसी पीड़ा चक्कर आना जैसे लक्षण होते हैं, यहाँ तक कि मृत्यु भी हो सकती है। “

पानी में पेट को साफ़ करने की असाधारण शक्ति है। बरसात में जहाँ तक हो सके कम जल पियें। सर्दी में जरुरत के अनुसार और गर्मी में थोड़ा ज्यादा जल पियें। दिन भर में कम से कम ४-५ गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।यह पानी रात को भर कर रखे ताम्बे के बर्तन में से सुबह पीने वाले ३-४ गिलास पानी से अलग है।यह सब मात्रा भी एक अनुमान है। व्यक्ति को अपने काम और वातावरण के हिसाब से जल पीना चाहिये। जैसे आप मेहनत ज्यादा करते हैं और पसीना ज्यादा निकलता है तो आपको जल ज्यादा पीने की प्राकृतिक प्यास लगती है।

शरीर के तापमान के जितने जल पीने से आप की प्यास बुझ जाए बस उतना ही पानी पियें। दूसरा सरल तरीका यह भी है कि आप अपने मूत्र के रंग पर ध्यान दें। यदि उसमे पीलापन है तो आप १-२ गिलास पानी और पीना शुरू कर दें जब तक कि मूत्र का रंग सफ़ेद न हो जाए।

यदि आप शीतल अर्थात ठन्डे जल का सेवन करते हैं तो शीतल जल के गुणों को आप प्राप्त कर सकते हैं। शीतल जल संतुष्टि देने वाला, ह्रदय को बल देने वाला, मन को प्रसन्न करने वाला, बुद्धि में चेतना लाने वाला, जल्दी ही पचने वाला और अमृत के समान गुण वाला है।

यदि आप वृद्ध या बीमार है तो गर्म जल सेवन करने का विधान है। गर्म जल भूख बढ़ाने वाला ,भोजन को पचाने वाला ,गले को ठीक करने वाला (यदि कफ हो तो ) , आँतों को साफ़ करने वाला , वायु और कफ के रोगों को नष्ट करने वाला कहा गया है। पंचकर्म या नए बुखार ,खांसी ,आंव ,श्वांस और पीठ में जिसके दर्द (पाश्र्वशूल ) रोग हो उस में गर्म /गुनगुना जल पीना चाहिये।

परन्तु बिना रोग के शीतल जल ही सेवन करना श्रेष्ठ है।

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